Thursday, June 17, 2021

जरा - जरा सी बात पे वो बिगड़ जाती है

Artist: Pelipoer Lara


 जरा - जरा सी बात पे वो बिगड़ जाती है 

क़ोशिश बहुत की मगर ये रात ख़िसक जाती है 

चेहरे पे उसकी उदासी जब भी आती है 

मेरी सारी तमन्नायें यूँ ही सुलग जाती हैं 


हालाते-जहर वो अपनी छुपा ले जाती है

कितना भी पूछूं बातों में बहका ले जाती है 

सारे दर्द को वो अकेले ही उठा ले जाती है 

अपनी सारी ख़ुशियों को मेरा पता दे जाती है 


एक-एक कर के सारे दिन बिछड़ जाते हैं 

होश में आते ही वो सदियों में बदल जाते हैं 

कैसे कहूं उसके ना होने का सिलसिला 

हर रात उसकी यादें मुझे उठा ले जाती हैं 


मोहब्बत को किताबों में सजा दी जाती है

ज़माने में उसको लटका दी जाती है 

रहने दो अब कुछ नही कहना है मुझे 

हर रोज उसकी सिसकियाँ रुला जाती हैं 




Thursday, June 3, 2021

इतना दर्द भर देंगे


Artist : Ben Mack


 इतना दर्द भर देंगे 

हर एक वक़्त में 

कि ख़्वाबों को पूरा करने के लिए 

ख़ुदा मज़बूर हो जायेंगे 


 हर ज़ख्मों को खेतों में बो देंगे 

और उन्हें ही खा के ज़िंदा रहेंगे 

फिर देखते हैं 

आप कैसे नज़र अंदाज़ करते हैं 


अपने ही आँसुओं कि दरिया में  

जब कश्ती लेके उतरेंगें 

फिर देखते हैं मेरी चाहतों को मिटाने वाले 

कितना जिग़रा रखते हैं 

Wednesday, June 2, 2021

कोई है जो मिलने वाला है



Artist : Gift Habeshaw


 कोई है जो मिलने वाला है 

सब्र का फंदा जलने वाला है 

कहीं ये नज़रों का धोखा तो नहीं 

की सिर्फ वो मुझे आजमाने वाला है 


इंतज़ार में उसके मैं अब रुकने वाला हूँ 

चलना छोड़ दिया बेसक मैं अब हारने वाला हूँ 

करीबियां बढ़ गयीं अब मौसम बिछड़ने वाला है 

ऐसे मोड़ पे अब कोई ना सम्हलने वाला है 


चेहरा बता दिया वो नज़रें चुराने वाला है 

लगता है किसी और का होने वाला है

बहुत जली ये ज़मीं फ़रेबी अंदाज़ पे 

घटा आ गयी अब आंसू बरसने वाला है  


फिर कभी मिल के इन रिश्तों को रफ़ू ना करने वाला हूँ 

भीड़ में बहुत जी लिया अब अकेले ही रहने वाला हूँ 

वैद - हकीमों के पास इसकी कोई दवा नहीं है 

नींद बीमार है अब मैं ना सोने वाला हूँ 





Monday, May 31, 2021

जो नाराज़ हैं उन्हें नाराज़ ही रहने दो

Artist : Paritosh Soren

 

जो नाराज़ हैं उन्हें नाराज़ ही रहने दो 

उनकी नज़रों में मुझे गुनेहगार ही रहने दो 

जब भी पास जाता हूँ मेरी हैसियत बताने लगते हैं 

महलों में वो जीते कैसे हैं ये दिखाने लगते हैं 


अभी ज़िन्दगी के कई पल बाक़ी हैं आने तो दो 

जो लगी है अंदर आग उसे बाहर तक फ़ैलाने तो दो 

पहचान लोगे हर एक पायदान को जिसपे पैर रख के चढ़े थे

फिर तुम कहोगे ये मेरा ग़ुरूर था इसे बिक जाने तो दो  


लहरों की तरह वापस आओगे ज़रा वक़्त आने तो दो 

मेरे कई दर्द हैं ज़रा आपस में सबको टकराने तो दो 

जहाँ से गए थे वहीं आके खड़े हो जाओगे 

ये जीवन काल चक्र है ज़रा इसे घूम जाने तो दो 



Friday, May 28, 2021

हिन्दू ना मुस्लिम चलो इंसान हो जाएँ


Photographer : Renato Danyi

हिन्दू ना मुस्लिम चलो इंसान हो जाएँ 

हर रंजिशों को छोड़ के एक साथ हो जाएँ 

एक बार फिर आजादी के लिए कुर्बान हो जाएँ 

तुम भगत सिंह हम आज़ाद हो जाएँ 


क्यों आपसी जलन में जल के राख हो जाएँ

हिन्दू ना मुस्लिम चलो इंसान हो जाएँ 


रोना छोड़ के चलो खुशियों के जमींदार हो जाएँ 

गल्तियां जिसकी भी हों, हम जिम्मेदार हों जाएँ 

इसने ये किया, उसने वो किया, बस करो 

कुछ तुम तो कुछ हम भी समझदार हों जाएँ 


क्यों आपसी जलन में जल के राख हो जाएँ

हिन्दू ना मुस्लिम चलो इंसान हो जाएँ 


खुशियां समेटे चलो दर्द से पार हों जाएँ 

इंसानियत के थोड़ा तो हक़दार हों जाएँ 

नादानियों में हमने सारा कुनबा लुटा दिया 

अब तो इस दरिया से चलो पार हों जाएँ 


क्यों आपसी जलन में जल के राख हो जाएँ

हिन्दू ना मुस्लिम चलो इंसान हो जाएँ 


Friday, May 7, 2021

दर्द हो तो गाने लगते हैं

 



दर्द हो तो गाने लगते हैं

थोड़ी सी चोट पे आंसू बहाने लगते हैं

भाई ये एक दो दिन की लड़ाई नहीं है

इसमें ज़माने लगते हैं

 

कमज़ोर समझ के सताने लगते हैं

रुतबा हो तो हाथ मिलाने लगते हैं

खुद के बातों पे जब ऐतबार नहीं होता

अपने ही लब्ज़ों को मिटाने लगते हैं

 

बर्बादियों के निमंत्रण में मैख़ाने लगते हैं

पैसे  ज़्यादा हों तो कपडे पुराने लगते हैं

ये कल के लोग रिश्तों को क्या जाने

थोड़ी हैसियत में ही इतराने लगते हैं

 

आसमां की गहराइयों में परिंदे मुरझाने लगते हैं

औकात से ज़्यादा मिले तो लोग पगलाने लगते हैं

बिना हुनर के लहरों से मत टकराना

वो पत्थरों को भी रेत बनाने लगते हैं

Wednesday, April 14, 2021

बहुत कुछ हम भी सिखाएंगे


बहुत कुछ हम भी सिखाएंगे 

ज़िन्दगी भर सीखते ही नहीं रह जायेंगे 

ख़ामोशियों को ज़रा इकठ्ठा तो हो जाने दो 

फिर देखना हम शोर कैसे मचाएंगे 


झूठ हम भी सलीके से बोलेंगे 

सच के अंगारों में जलते ही नहीं रह जायेंगे 

अभी गुनाह करने की आदत तो पड़ जाने दो 

फिर मौत का खेल हम भी दिखाएंगे 


गलियों में मार पीट हम ना करेंगे 

चौकी-थाना तक सिमट के ना रह जायेंगे 

महीनो तक धुंआ उड़ेगा गोलियां जहाँ भी चलाएंगे 

फिर गुंडई करते कैसे हैं हम भी समझायेंगे 


Thursday, April 8, 2021

मिली है जो विरासतें


मिली है जो विरासतें 

उसे यूँ ना बर्बाद करो 

मुश्किल से ईमान रौशन है 

उसे यूँ ना गुनेहगार करो


दिन चमकता है 

उसे बेशक प्यार करो 

रात अंधेरों का है 

उसे यूँ ना बदनाम करो 


दुश्मन अगर मिल जाये   

हरि समझ के नमस्कार करो 

इश्क़ अगर समझ में ना आये

तो दर्द का ही कारोबार करो 


लड़ाइयां अकेले ही लड़नी है 

ये समझो और ऐलान  करो 

चिल्लाने से कुछ नहीं होगा 

जाओ बढ़ो  कुछ काम करो 


मिलेगा ना कुछ इस हालात पे 

थोड़ा और ज़ख़्मों से बात करो 

ज़मीं आसमां हिल जाये

कुछ ऐसा काम करो 





 

 

Thursday, March 25, 2021

चेहरा देखे हुए ज़माना हो गया



 

चेहरा देखे हुए ज़माना हो गया 

नक़ाबों में इंसानों का रहना हो गया 

खुद को इतना शातिर ना समझों 

कमियां छुपाने का दौर अब पुराना गया 


रूठे हुए बारिशों के बाद अब मौसम सुहाना हो गया

जहाँ लोग जाने से डरते थे वहां आज मैखाना हो गया 

सिद्दत से निभाया था दरबारी का काम वो 

पूरे दरबार में आज उसी का मालिकाना हो गया 


ऐसी ही थी उसकी खूबसूरती की मैं दीवाना हो गया 

ना चाहते हुए भी उसके दर्द पे मुस्कुराना हो गया 

बस इतने ही खिस्से से पछताना हो गया 

अब हम दोनों का अलग-अलग आना-जाना हो गया 

Thursday, March 18, 2021

रहने दो तुम अब क्या करोगे

 


रहने दो तुम अब क्या करोगे 

साज़िशों में फंसा के वकालत करोगे 

कोई और रास्ता नहीं मिला तुम्हे 

रिस्तों में फंसा के सौदा करोगे 


करने दो हरकतें उसे रोकेंगे 

तुम सही रहना खुदा उसे देखेंगे 

और बच के रहना तुम भी 

तुम्हारे कर्मो पे भी वो सोचेंगे 


लोग आते और जाते रहेंगे 

आवा जाही में रिस्तें निभादेन्गे 

गल्ती से भी पीछे मत रह जाना 

थोड़ी भी दुरी बढ़ी तो लोग तुम्हे भुला देंगे 


Friday, March 5, 2021

ये जो आज मेरे हक़ की रोटियां खाये जा रहे हैं

 


ये जो आज मेरे हक़ की रोटियां खाये जा रहे हैं 

ये अपने ही जख्मों को सजाये जा रहे हैं 

बेवजय लोगों को रुला के  

अपने लिए आंसू बनाये जा रहे हैं 


दूसरों की गल्तियों पे मुस्कुराये जा रहे हैं 

अपने तमाम चूतियाफे को छुपाये जा रहे हैं 

पिछवाड़े से कुर्सियाँ खिसक ना जाये 

ऐसी तमाम तिकड़म-बाज़ी लगाए जा रहे हैं 


मैं बड़ा तुम छोटे ये समझाए जा रहे हैं 

दो कौड़ी के सपने दिखाए जा रहे हैं 

मैं बज़बूत तो बन ही जाऊँगा 

मेरी नज़रों में ये खुद को गिराए जा रहे हैं 

Wednesday, March 3, 2021

खिलता है और गिर के खो जाता है

 


खिलता है और गिर के खो जाता है 

काँटों के बीच में वो मुस्कुराता है 

मोहब्बत पे उसकी बलि चढ़ती है 

कैसा है ये मैयत पे भी नज़र आता  है 


अंगारों में तप के दीयों का गुज़रना होता है 

सीने में आग जला के रौशनी बिखेरना होता है 

कोई देख ना ले पैरों के नीचे का अँधेरा 

दीयों को ये भी छुपाना होता है 


छतों को कहीं और नहीं जाना होता है 

दीवारों पे लेट के एक आशियाँना बनाना होता है 

बारिश, धूप, अँधेरा कितना भी हो 

घरों की खुशियों में थोड़ा मुस्कुराना होता है 


Friday, February 26, 2021

दो ही चार दिन खेल के




 दो ही चार दिन खेल के 

वो ज्ञान पेलने लगा 

हम बरसों बिताये 

हम ही को रेलने लगा 


सामने मुझे बिठा के 

खुद ही खेलने लगा 

कहानियों के बीच में रख के 

करैक्टर निभाने लगा 


वो रुक गया ग़लतियाँ कर के 

मैं मुस्कुराने लगा 

वो रत्ती - रत्ती पूछ के 

खुद को निखारने लगा 



Wednesday, February 24, 2021

नफ़्रतों को हम दावत पे बुलाएँगे

 


नफ़्रतों को हम दावत पे बुलाएँगे 

और फिर बताएँगे उन्हें मरना होगा 

खुशियां चाहे जितना गिड़गिड़ाएं 

उन्हें जंजीरों में बांधना होगा 


कुछ रिस्ते कपड़ों की तरह फटेंगे 

उन्हें बातों से तुरपाई करना होगा 

लोग आँखें ना चुराएं 

ऐसा माहौल बना के रखना होगा 


लोग वक्त की तरह बिछड़ते चले जायेंगे 

बातों में मोहब्बत परोसना होगा 

कितना भी चिल्लाओ बदल नहीं पाओगे 

वक्त आने पे सबको मरना होगा 



Tuesday, February 23, 2021

हम प्यार करें या ना करें



 


हम प्यार करें या ना करें 

तुम्हे प्यार करना होगा 

हम झगड़ा रोज़ करेंगे 

तुम्हे सिर्फ सुनना होगा 


तुम्हारे मौन का क्या करें 

तुम्हे भी कुछ कहना होगा 

और रिस्ते ऐसे नहीं चलेंगे 

मुझे भी चुप रहना होगा 


हम क्यों ना तुझे रोज़ रुलाएं 

मेरे हंसने पे तुझे हंसना होगा  

बगैर तुम्हारे लोग भूल जायेंगे 

तुम्हे मेरे पास ही रहना होगा 

Sunday, February 21, 2021

सब कुछ हुआ



सब कुछ हुआ
बस यादगार नहीं हुआ
ऐसा नहीं की उम्मीद नहीं थी
बस हाथों में लकीर नहीं थी

कुछ भी नहीं हुआ  
अगर प्यार नहीं हुआ 
करने वाले कर के चले गए 
हम उम्मीद और लकीरों में फंसे रहे 

बहुत कुछ नहीं हुआ  
प्यार था प्यार ही हुआ 
मिले तो हम भी नहीं थे 
खतों का दौर था खतों से इजहार हुआ  

वही तो नहीं हुआ 
प्यार था यादों में शामिल हुआ 
क़दमों ने कई बार करवटें बदली 
हमने कहाँ बस अब बहुत हुआ 

Saturday, February 20, 2021

धरम संकट में पड़ गईल



छोड़ के रामलीला देखयं रासलीला 
चखना खइले पे कहें भईया तूँहूँ ले ला 
अब ना होई पाई रखवाली छोटकन कै
भांग गांजा पे खर्च होई जवानी 
धरम संकट में पड़ गईल

ना कोई बाजा , ना बाराती
ना ससुर , ना सास
मम्मी - पापा ना आइयें  
अब होई कोट - मैरेज
धरम संकट में पड़ गईल

ना हर - ज्वाठ , ना बरधा
ना गोबर की खाद
छिटल जाई यूरिया - डाई
और टक्टर से होई जोताई
धरम संकट में पड़ गईल

ना बकरी , ना गाय का दूध
ना नदियन कई दहिया
भूल गए मख्खन और माठा
बिकय पाउडर , पैकिट
धरम संकट में पड़ कईल

अब ना चलिहये   देशी - महुआ
ना चलिहय छत्तीसा
पियें झोर के रेड लेबल
और उपर से मांगे सोडा
धरम संकट में पड़ गईल

अब ना बिकी चटहिया चलेबी
ना केहू खाई गुड़ कई खाझा
चहिया पी के करें दवाई
अव मर गईले पे बजे शहनाई
धरम संकट में पड़ गईल

Friday, February 19, 2021

चेहरे पे उसके गहरी ख़ामोशी होती है




चेहरे पे उसके गहरी ख़ामोशी होती है  

हालातों से लड़ने की उसकी कोशिश होती है ||

तुम उसे डराने में लगे रहे 

वो अपने मंज़िलों से रूबरू है हर क़दम पे उसके चुनौती होती है || 


दिखता नहीं है मग़र बादलों में बारिश होती है 

क़रीब जाओगे उसके दिल के, तुम्हारे दर्द की भी वहां हिफाज़त होती है ||

कैसे संभल जाता है वो लड़खड़ा के 

जब उसके हाथों में बहनो की राखी होती है ||


जख्मों की क़तारें लगती है तब जाके उसके आँखों से बारिश होती है 

ज्यादा बकबक मत करो बातों पे उसके क्रांति होती है ||

हर किसी की तरह हल्के में तूँ लेता है जिसे 

सच कहूं तो मंज़िलें उसी को हासिल होती हैं ||


उसकी हाथों में जो क़लम ठहरती है 

रातों में उसकी उससे बातें होती हैं ||

यक़ीं ना हो तो इतिहास से जाके पूछो 

उसके घर में उसकी पूजा होती है ||

Thursday, February 18, 2021

दीमक

 



जिनका मुझसे थोड़ा विस्तार हुआ 

वो आज मुझे समझाने लगे हैं ||

मैंने अपने क़रीब आने दिया

वो मुझे लूट के अब जाने लगे हैं।।

 

जिन्हे थोड़ा सा हासिल हुआ

वो अब क़तराने लगे हैं ||

थोड़ी मुझमे क़ाबिलियत दिखी

वो लौट के वापस आने लगे हैं ।।

 

जिन्हे लोगों ने ठुकरा दिया 

वो लहरों से अब टकराने लगे हैं ||

लोगों ने जिसे ख़ूब रुलाया

वो अब मुस्कुराने लगे हैं ।।

 

जिन्हे मोहब्बत ने नकार दिया

वो अब प्रेम गीत गाने लगे हैं ||

लोगों ने जिन्हे भुला दिया था

आज उन्ही की बातें करने लगे हैं ||

 

जिन्हे ठोकरों ने कई बार गिराया

आज रास्ते उन्हें सम्हालने लगे हैं ||

रोटियां अक्सर जिनकी जल जाया करती थीं

वो आज माल-पुआ खाने लगे हैं ||

 

जिनसे बरसों तक मोम नहीं पिघला

वो आज पत्थर पिघलाने लगे हैं ||

चारो तरफ जिसकी बुराइयां होती थीं

आज वो तारीफों में नहाने लगे है ||

 

जो देश को बचाने में नेता बन गए

वो आज दीमक बनके चबाने लगे हैं ||

खुद को जो नास्तिक बताते थे

वो आज मंदिरमस्जिद जाने लगे हैं ||

समस्या बतायी जा रही है

समस्या बतायी जा रही है  सबको दिखाई जा रही है  ये भी परेशान है  ये बात समझायी जा रही है   देसी दारू पिलाई जा रही है  रेड लेबल छुपाई जा रही है...